सूर्य ग्रहण(solar eclipse) का होना एक वैज्ञानिक घटना है। सूर्य ग्रहण तब होता है, जब अमावस्या पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाती है, जिससे पृथ्वी की सतह के कुछ हिस्सों पर छाया बनती है। यह सूर्य ग्रहण सितंबर के आखिरी दिनों में पड़ रहा है। यह ऐसा समय है, जब दिन और रात लगभग बराबर होते हैं। यह संयोग इस सूर्य ग्रहण में लोगों की दिलचस्पी को और बढ़ा रहा है।
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सूर्य ग्रहण(solar eclipse) का होना एक वैज्ञानिक घटना है। सूर्य ग्रहण तब होता है, जब अमावस्या पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाती है, जिससे पृथ्वी की सतह के कुछ हिस्सों पर छाया बनती है। यह सूर्य ग्रहण सितंबर के आखिरी दिनों में पड़ रहा है। यह ऐसा समय है, जब दिन और रात लगभग बराबर होते हैं। यह संयोग इस सूर्य ग्रहण में लोगों की दिलचस्पी को और बढ़ा रहा है।
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साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर की रात 10 बजकर 59 मिनट से शुरू होगा और इसकी समाप्ति 22 सितंबर की सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर होगी। ग्रहण आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा।
नकारात्मक ऊर्जा से बचें(Avoid negative energy) – ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है। ऐसे में मानसिक शांति बनाए रखने के लिए वैदिक मंत्रों का जाप करना चाहिए।
खाने-पीने का परहेज(Avoid eating and drinking) – भले ही सूतक काल न लगे, लेकिन कई लोग ग्रहण के समय भोजन और पानी से परहेज करते हैं।
गर्भवती महिलाएं(Pregnant women) – गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें ग्रहण के समय घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक काम(Religious work) – ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके और पूजा-पाठ करके ही कोई काम शुरू करना चाहिए।
यह सूर्य ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, अफ्रीका, हिंद महासागर, दक्षिण प्रशांत, अटलांटिक और दक्षिणी महासागर सहित पोलिनेशिया, मेलानेशिया तथा एशिया के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. इसके अलावा, न्यूजीलैंड के प्रमुख शहर जैसे ऑकलैंड, क्राइस्टचर्च, वेलिंगटन और नॉरफॉक द्वीप का किंग्स्टन भी इस खगोलीय घटना के साक्षी बनेंगे.
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः।
Om Hram Hrim Hram Sah Surya Namah.
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा ।।
Om Hreem Hreem Surya Sahasrakiranrai, the desired fruit of the body, Swaha.
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते,
अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर: ।।
om Aihi Surya Sahastranshon Tejo Rashe Jagatpate,
Anukampayeman Bhaktya, Ghrhanarghaya Divakar:।
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सूर्य ग्रहण खगोलीय और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से एक महत्वपूर्ण घटना है। जहाँ वैज्ञानिक अध्ययन आकाशीय यांत्रिकी को समझने पर केंद्रित हैं, वहीं हिंदू परंपराएँ इसे शुद्धिकरण और दैवीय प्रभाव से जोड़ती हैं। चाहे आप धार्मिक मान्यताओं को मानें या वैज्ञानिक दृष्टिकोण को, सूर्य ग्रहण एक आकर्षक घटना है जिसे उचित सावधानियों के साथ देखा जाना चाहिए।