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🌼 शारदीय नवरात्रि 🌼

॥ ॐ श्री परमात्मने नमः ॥

🚩 शारदीय नवरात्रि 2025 🚩

नवरात्रि पूजन विधि(Navratri Pujan Vidhi):
  • नवरात्रि के दिन सबसे पहले नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ पानी से स्नान कर लें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।  

  • इसके बाद कलश की स्थापना करना चाहिए। जिसमे आम के पत्ते व पानी डालें । कलश पर पानी वाले नारियल को लाल वस्त्र या फिर लाल मौली में बांध कर रखें।  

  • उसमें एक बादाम, दो सुपारी( betel nuts) एक सिक्का जरूर डालें । 
     
  • तत्पश्चात मूर्ति का आसन, पाद्य, अर्द्ध, आचमय, स्नान, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन, पुष्पांजलि, नमस्कार, प्रार्थना आदि से पूजन करें।  

  • मां दुर्गा को फल और मिठाई का भोग लगाएं। धूप, अगरबत्ती से माता रानी की आरती उतारें।  
  • इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती(Durga Saptashati ) का पाठ दुर्गा स्तुति करें। पाठ स्तुति करने के बाद दुर्गाजी की आरती करके प्रसाद वितरित करें।  

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🕰️ Sharadiya Navratri Ghatasthapana 2025 Date & Time:📅


अश्विन घटस्थापना सोमवार, 22 सितंबर 2025 को 

घटस्थापना मुहूर्त – प्रातः 06:27 बजे से प्रातः 08:17 बजे तक 

अवधि – 01 घंटा 50 मिनट 

घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:07 बजे से 12:55 बजे तक 

अवधि – 00 घंटे 49 मिनट 

घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि को पड़ता है 

घटस्थापना मुहूर्त द्वि-स्वभाव कन्या लग्न के दौरान पड़ता है 

प्रतिपदा तिथि प्रारंभ – 22 सितंबर 2025 को प्रातः 01:23 बजे से 

प्रतिपदा तिथि समाप्त – 23 सितंबर 2025 को प्रातः 02:55 बजे 

कन्या लग्न प्रारंभ – 22 सितंबर 2025 को प्रातः 06:27 बजे से 

कन्या लग्न समाप्त – 22 सितंबर को प्रातः 08:17 बजे, 2025 

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🙏 दुर्गा के 9 अवतार और इस त्यौहारी सप्ताह में पहनने के लिए 9 रंग 🙏 

 
               भारत को पवित्र और उत्साहपूर्ण त्यौहारों के साथ आनंदित होने वाली भूमि के रूप में जाना जाता है। भारतीय धरती पर मनाए जाने वाले कई त्यौहारों में से, नवरात्रि इसके सबसे शानदार और दिव्य उत्सवों में से एक है जिसे मुख्य रूप से हिंदू समुदाय द्वारा मनाया जाता है। 

  
              नवरात्रि शब्द दो शब्दों “नव” का मेल है, जिसका अर्थ है नौ और “रात्रि”, जिसका अर्थ है रातें, इसलिए जब इन्हें जोड़ा जाता है, तो यह नौ दिनों तक चलने वाले उत्सव का प्रतीक बन जाता है। नौ दिनों का यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत को स्वीकार करता है, अधर्म पर धर्म की पुनर्स्थापना करता है, नकारात्मकता को दूर करता है और सकारात्मकता और पवित्रता का विकास करता है। 

  
              नवरात्रि के दिनों में, महिला ब्रह्मांडीय शक्ति – देवी दुर्गा की पूजा की जाती है, उनके नौ रूपों में उनका गायन और आह्वान किया जाता है। माँ दुर्गा द्वारा प्रकट किए गए सभी रूप शक्ति(power), ताकत(strength), बहादुरी(bravery), ज्ञान( knowledge), सौंदर्य(beauty), अनुग्रह(grace) और शुभता(auspiciousness) का प्रतीक हैं। 

  
नौ दिनों तक दुर्गा मां( Durga Maa) के इन नवरात्रि अवतारों की पूजा की जाती है: 


शैलपुत्री(Shailaputri)
:
नवरात्रि के 9 दिनों के देवी नामों में से पहला दिन देवी शैलपुत्री का दिन है। शैलपुत्री का शाब्दिक अर्थ है पर्वत (शैल) की पुत्री (पुत्री)। उन्हें सती, भवानी, पार्वती और हेमवती के नामों से भी जाना जाता है। वे ब्रह्मा, विष्णु और महादेव की शक्ति का पूर्ण अवतार हैं। देवी के माथे पर अर्धचंद्र, दाहिने हाथ में त्रिशूल(trident) और बाएं हाथ में कमल है। वे नंदी बैल पर सवार हैं। 

  
पहनने के लिए रंग: शैलपुत्री के दिन नारंगी रंग समर्पित है। यह उत्साह, सफलता और खुशी का प्रतिनिधित्व करता है। 

ब्रह्मचारिणी(Brahmacharini): दूसरा दिन देवी ब्रह्मचारिणी का होता है। वे तपस्या और तपस्या की माँ हैं क्योंकि उनका नाम ब्रह्मचारिणी उस महिला का प्रतिनिधित्व करता है जो ब्रह्मचर्य (सांसारिक सुखों से त्याग) का पालन करती है। वह नंगे पैर चलती हैं, उनके दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल है। वह अपने भक्तों को कृपा, आनंद, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं। 

  
पहनने के लिए रंग: सफेद ब्रह्मचारिणी का रंग है जो पवित्रता, कौमार्य, आंतरिक शांति और पवित्रता का पर्याय है। 

चंद्रघंटा(Chandraghanta): तीसरा दिन नवरात्रि देवी चंद्रघंटा का होता है। चंद्रघंटा अपने माथे पर घंटी के आकार का आधा चाँद पहनती हैं, जो उनके नाम की व्युत्पत्ति का वर्णन करता है। उन्होंने भगवान शिव से विवाह करने के बाद अपने माथे पर आधा चाँद सजाया। जीवन में शांति और समृद्धि के लिए तीसरे दिन अनुयायी उनकी पूजा करते हैं। वह एक बाघिन पर सवार हैं और उन्हें दस हाथों और तीन आँखों वाला बताया गया है। वह अपने चार बाएँ हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार और कामदलु धारण करती हैं जबकि उनका पाँचवाँ हाथ वरदमुद्रा में है। वह अपने दाहिने चौथे हाथ में कमल, बाण, धनुष, जप माला रखती हैं और अपना पाँचवाँ दाहिना हाथ अभय मुद्रा में रखती हैं। 

  
पहनने के लिए रंग: नवरात्रि के तीसरे दिन, भक्त जोश, निडरता और कामुकता के लिए लाल रंग पहनते हैं। 

कुष्मांडा(Kushmanda): देवी कुष्मांडा में धधकते सूरज के अंदर रहने की शक्ति है, इसलिए उन्हें कुष्मांडा नाम दिया गया है। सूर्य के समान चमकदार शरीर होने के कारण, उन्हें अपनी दिव्य और उज्ज्वल मुस्कान के साथ दुनिया बनाने का श्रेय दिया जाता है। इस देवी का नवरात्रि महत्व यह है कि वह अपने भक्तों को अच्छी सेहत, शक्ति और ताकत प्रदान करती हैं। उन्हें आठ हाथों से दर्शाया गया है, इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी के नाम से जाना जाता है। उनके रूप को आठ से दस हाथों में त्रिशूल, चक्र, तलवार, हुक, गदा, धनुष, बाण, शहद के दो घड़े और रक्त धारण किए हुए दिखाया गया है। उनका एक हाथ हमेशा अभय मुद्रा में रहता है, वह अपने सभी अनुयायियों को आशीर्वाद देती हैं। वह बाघ पर सवार होती हैं। 

  
पहनने के लिए रंग: इस दिन का रंग रॉयल ब्लू है और देवी लालित्य और समृद्धि का प्रतीक है। 

स्कंदमाता(Skandamata): नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता के लिए है – युद्ध के देवता स्कंद (कार्तिकेय) की माँ। वह क्रूर शेर की सवारी करती हैं और भगवान स्कंद (शिशु) को अपनी गोद में उठाती हैं। ऐसा माना जाता है कि उन्हें राक्षस के खिलाफ युद्ध के लिए सेनापति के रूप में चुना गया था, इसलिए उन्हें “अग्नि की देवी” के रूप में भी जाना जाता है। इस महिला भगवान की प्रतिमा को चार हाथों से दर्शाया गया है, उनके ऊपरी दो हाथों में कमल का फूल, एक हाथ अभय मुद्रा में और एक दाहिने हाथ में वह स्कंद को धारण करती हैं। उन्हें अक्सर कमल के फूल पर बैठे हुए चित्रित किया जाता है और उन्हें पद्मासनी के रूप में जाना जाता है। 

  
पहनने के लिए रंग: पीला रंग पहनें क्योंकि यह आपको खुश और ऊर्जावान बनाए रखेगा। 


कात्यायनी(Katyayani):
माँ दुर्गा का छठा रूप कात्यायनी है जिसे महालक्ष्मी के रूप में भी पूजा जाता है। कात्यायनी का जन्म बैल राक्षस महिषासुर को नष्ट करने के लिए हुआ था। उनकी परिभाषित विशेषताओं में क्रोध, प्रतिशोध और बुराइयों पर अंतिम विजय शामिल है। जो लोग सच्चे दिल और पूरी आस्था के साथ उन्हें याद करते हैं, उन्हें वरदान मिलते हैं। वह एक शानदार शेर पर विराजमान हैं और उन्हें चार हाथों से चित्रित किया गया है। उनके बाएं हाथ में तलवार और कमल है और दाएं हाथ अभय मुद्रा और वरदमुद्रा में हैं।


पहनने के लिए रंग: हरा रंग नई शुरुआत से जुड़ा है। इसे उर्वरता और विकास की भावना जगाने के लिए पहना जाता है। 

कालरात्रि(Kalratri): साँवले रंग, उग्र आत्मा और निडर मुद्रा वाली माँ। उनकी बड़ी लाल आँखें, लाल जीभ और हाथ पर सोबर उन्हें मृत्यु की देवी बनाता है। साथ ही, उन्हें काली माँ और कालरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। वे बिखरे हुए काले बालों और तीन गोल आँखों वाली गधे पर बैठी दिखाई देती हैं। उनके चार हाथ हैं। दाहिना हाथ अभय मुद्रा और वरदार मुद्रा में है और बाएँ हाथ में तलवार और लोहे का हुक है। 

  
पहनने के लिए रंग: इस दिन ग्रे रंग पहना जाता है। यह ऊर्जा को संतुलित करता है और लोगों को जमीन से जुड़ा रखता है। 

महागौरी(Mahagauri): महागौरी देवी दुर्गा का आठवाँ रूप है और इसे नवरूपों में सबसे सुंदर रूप माना जाता है। उनकी सुंदरता मोती की तरह चमकती है। पवित्रता, स्वच्छता, धीरज और शांति की देवी होने के कारण, उनके उपासक के दोष और गलतियाँ भस्म हो जाती हैं। महागौरी की चार भुजाएँ हैं। वह अपने दाहिने हाथ को दुख दूर करने की मुद्रा में रखती हैं और निचले दाहिने हाथ में त्रिशूल रखती हैं। उनके ऊपरी बाएँ हाथ में तंबूरा है और निचले बाएँ हाथ से आशीर्वाद मिलता है। 

पहनने के लिए रंग: महागौरी पूजा के लिए, बैंगनी रंग पहनें जो वैभव, कुलीनता और शक्ति का प्रतीक है।
 

सिद्धिधरती(Siddhidharti): उनके पास प्राकृतिक उपचार शक्तियाँ हैं। वह आनंदित और मनमोहक मुद्रा में विराजमान हैं। वह देवी सिद्धिधरती हैं जो या तो कमल पर या बाघ या शेर पर सवार होकर यात्रा करती हैं। उनके चार हाथ हैं। उनके एक हाथ में गदा और दूसरे में चक्रम है। एक में कमल का फूल और दूसरे में शंख है। 

  
पहनने के लिए रंग: मोर हरा रंग पहनें और अनुग्रह, अखंडता और सतर्कता प्रकट करें। 


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Mantras of  Shardiya Navratri:
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Maa Shailputri Puja Mantra

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥ 

Om Devi Shailputryai Namah. 

  
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ 

Vande Vanchitlabhay Chandrardhakrit Shekharam.
Vrusharudham shuldhram shailputri yashsvanim. 

  
Maa Brahmacharinya Puja Mantra

  
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥ 

Om Devi Brahmacharinya Namah. 

 
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ 

Dadhana kar Padmabhyamkshamala kamandalu.
Devi Prasidatu Mayi Brahmacharinyanuttama॥ 

  
Maa Chandraghanta Puja Mantra

ॐ एं ह्रीं क्लीं ।

Om En Hreem Kleem. 

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता ।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता ॥ 

Pindjapravararudha chandakopastrakaryuta.
Prasadam tanute mahyam chandraghanteti vishruta. 

  
Maa Chandraghanta Puja Mantra 

  
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥ 

Om Devi Kushmandayai Namah. 

सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥ 

Surasampoorna Kalashna Rudhiraplutmeva Ch.
Dadhana Hastapadmaabhyam Kushmanda Shubhadaastu me. 

  
Goddess Skandmata Puja Mantra 

  
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ 

Om Devi Skanda Matayai Namah. 

 

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ 

Simhasanagata Nityam Padmanchit Kardvaya.
Shubhdastu sada  Skandmata Yashaswini. 

  
 Maa Katyayani Puja Mantra 

 

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥ 

Om Devi Katyayanyai Namah. 

 

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥ 

Chandrahasojjwalkara shardulvarvahana.
Katyayani Shubham Dadyad Devi Danav Ghatini॥ 

  
Maa Kalratri Puja Mantra

 
ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:॥ 

Om Ain Hreem Kleem Chamundayai Vicchai Om Kalratri Daivye Namah. 

 
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥ 

Ekveni Japakaranpura nagna khrasthila.
Lamboshthi Karnikakarni tailabhkat sharirini.
Vampadollsalloh Latakantakabhushana.
Vardhan Murdhadhwaja Krishna Kalratribhayankari. 

  
Maa Mahagauri Puja Mantra 
 

ॐ देवी महागौर्यै नमः॥ 

Om Devi Mahagauriai Namah. 

 

श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥ 

Shwete Vrishesmarudha Shwetambardhara Shuchih.
Mahagauri Shubham Dadyanmahadev Pramodada॥ 

 
Mantra of Maa Siddhidatri 

 

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥ 

Om Devi Siddhidatrya Namah. 

 

सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥ 

Siddha Gandharva Yakshadyairsurairamairaripi.
Sevyamana always bhuyat siddhida siddhidayini. 

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मां दुर्गा की आरती  ॥
 

  

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। 

तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ 

जय अम्बे गौरी 

 

माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को। 

उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ 

जय अम्बे गौरी 

  

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। 

रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ 

जय अम्बे गौरी 

 

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी। 

सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥ 

जय अम्बे गौरी 

  

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। 

कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥ 

जय अम्बे गौरी 

 

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। 

धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥ 

जय अम्बे गौरी 

  

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। 

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ 

जय अम्बे गौरी 

 

ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी। 

आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥ 

जय अम्बे गौरी 

  

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ। 

बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥ 

जय अम्बे गौरी 

 

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। 

भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ 

जय अम्बे गौरी 

  

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी। 

मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ 

जय अम्बे गौरी 

 

कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। 

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ 

जय अम्बे गौरी 

  

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै। 

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥ 

जय अम्बे गौरी 

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🙏 विश्वम्भरी स्तुति 🙏

  

विश्वंभरी अखिल विश्व तनी जनेता 

विद्या धरी वदनमा वसजो विधाता  

दुर्बुद्धिने दूर करी सदबुद्धि आपो  

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो    

  

भूलो पड़ी भवरने भटकू भवानी 

सूझे नहीं लगिर कोई दिशा जवानी  

भासे भयंकर वाली मन ना उतापो   

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो    

  

आ रंकने उगरावा नथी कोई आरो 

जन्मांड छू जननी हु ग्रही बाल तारो 

ना शु सुनो भगवती शिशु ना विलापो 

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो    

  

माँ कर्म जन्मा कथनी करता विचारू  

आ स्रुष्टिमा तुज विना नथी कोई मारू  

कोने कहू कथन योग तनो बलापो 

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो    

  

हूँ काम क्रोध मद मोह थकी छकेलो  

आदम्बरे अति घनो मदथी बकेलो 

दोषों थकी दूषित ना करी माफ़ पापो  

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो    

  

ना शाश्त्रना श्रवण नु पयपान किधू  

ना मंत्र के स्तुति कथा नथी काई किधू 

श्रद्धा धरी नथी करा तव नाम जापो 

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो    

  

रे रे भवानी बहु भूल थई छे मारी  

आ ज़िन्दगी थई मने अतिशे अकारि 

दोषों प्रजाली सगला तवा छाप छापो 

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो    

  

खाली न कोई स्थल छे विण आप धारो 

ब्रह्माण्डमा अणु अणु महि वास तारो 

शक्तिन माप गणवा  अगणीत  मापों 

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो    

  

पापे प्रपंच करवा बधी वाते पुरो 

खोटो खरो भगवती पण हूँ तमारो  

जद्यान्धकार दूर सदबुध्ही आपो  

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो  

  

शीखे सुने रसिक चंदज एक चित्ते  

तेना थकी विविधः ताप तळेक चिते  

वाधे विशेष वली अंबा तना प्रतापो  

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो    

  

श्री सदगुरु शरणमा रहीने भजु छू  

रात्री दिने भगवती तुजने भजु छू 

सदभक्त सेवक तना परिताप छापो 

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो    

  

अंतर विशे अधिक उर्मी तता भवानी 

गाऊँ स्तुति तव बले नमिने मृगानी  

संसारना सकळ रोग समूळ कापो 

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो 

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