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🌼 ऋषि पंचमी 🌼

॥ ॐ श्री परमात्मने नमः ॥

🚩 ऋषि पंचमी 2025 🚩

ऋषि पंचमी के बारे में(About Rishi Panchami):

                         ऋषि पंचमी(Rishi Panchami) हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष (वैक्सिंग मून फोर्टनाइट) के पांचवें चंद्र दिवस पर मनाई जाती है। यह गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन आती है। ऋषि पंचमी आमतौर पर गणेश चतुर्थी के एक दिन बाद आती है। यह सप्त ऋषियों यानी कश्यप(kashyap), अत्रि(Atri), भारद्वाज(Bharadwaja), विश्वामित्र(Vishvamitra), गौतम महर्षि(Gautama Maharishi), जमदग्नि(Jamadagni) और वशिष्ठ(Vashishtha) की पूजा है। केरल में, इस दिन को विश्वकर्मा पूजा(Vishwakarma puja) के रूप में भी मनाया जाता है। ऋषि पंचमी व्रत में मुख्य रूप से लोग उन महान ऋषियों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और स्मरण व्यक्त करते हैं जिन्होंने समाज के कल्याण में बहुत योगदान दिया। 

  
                 ऐसा माना जाता है कि ऋषि पंचमी व्रत का व्रत सभी के लिए लाभकारी होता है, लेकिन यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा रखा जाता है। ऋषि पंचमी का त्यौहार एक महिला द्वारा अपने पति के प्रति समर्पण, कृतज्ञता, विश्वास और सम्मान व्यक्त करने का तरीका है। इस त्यौहार पर व्रत रखने से जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है। 

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🕰️ Rishi Panchami 2025 Date & Time:📅

 ऋषि पंचमी  – 28 अगस्त 2025 गुरुवार को 

ऋषि पंचमी पूजा मुहूर्त – सुबह 11:06 बजे से दोपहर 01:35 बजे तक 

अवधि – 02 घंटे 29 मिनट 

पंचमी तिथि प्रारम्भ – 27 अगस्त 2025 को दोपहर 03:44 बजे 

पंचमी तिथि समाप्त – 28 अगस्त 2025 को शाम 05:56 बजे 

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💐ऋषि पंचमी व्रत से जुड़े लाभ और मान्यताएं(Benefits and beliefs associated with Rishi Panchami Vrat):💐
 
  • इस व्रत के पालन से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। 
  • स्त्रियों को रजस्वला(menstrual) काल की शुद्धि हेतु आत्मिक शांति मिलती है। 
  • परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य और संतति का आशीर्वाद मिलता है। 
  • पुण्य, मोक्ष और सात्विक जीवन की प्राप्ति होती है। 

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🍀ऋषि पंचमी पर व्रत रखने का उद्देश्य(The Purpose of Fasting on Rishi Panchami)
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                      हिंदू परंपरा के अनुसार, मासिक धर्म या पीरियड(menstrual cycle) (गर्भाशय की अंदरूनी परत से योनि के माध्यम से रक्त और श्लेष्म ऊतक का नियमित निर्वहन) से गुजर रही महिलाओं को तब तक धार्मिक कार्य करने या घरेलू काम (रसोई के काम सहित) में शामिल होने से मना किया जाता है जब तक कि वे उस अवस्था में न हों। उन्हें धर्म से जुड़ी चीजों को छूने की भी मनाही है। यदि गलती से या अन्य कारणों से इस आवश्यकता का उल्लंघन किया गया है, तो इस नियम का उल्लंघन करने वाली महिलाओं में रजस्वला दोष होता है। इस दोष से मुक्ति पाने के लिए महिलाएं ऋषि पंचमी का व्रत रखती हैं। 

  
ऋषि पंचमी को भाई पंचमी(Bhai Panchami) के नाम से भी जाना जाता है। माहेश्वरी समुदाय में इस दिन बहनें भाइयों को राखी बांधती हैं। बहनें इस दिन व्रत रखती हैं और अपने भाई की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। वे पूजा करने के बाद ही भोजन ग्रहण करती हैं।  

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🌻ऋषि पंचमी पूजा विधि(Rishi Panchami puja vidhi): 🌻 

  • व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें। साफ़ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को साफ़ करें। 
      
  • कुमकुम, हल्दी और रोली की मदद से ज़मीन पर एक वर्ग बनाएँ जिसे ‘मंडल(Mandal)’ कहते हैं। वर्ग के भीतर सप्तऋषि (सात ऋषियों) की मूर्ति या चित्र रखें। 
      
  • फिर, गंगाजल छिड़कें और मूर्ति या चित्र का पंचामृत अभिषेक करें। चंदन का टीका लगाएँ और सप्तऋषियों को फूल या माला अर्पित करें। 

  • फिर सप्तऋषियों को यज्ञोपवीत नामक पवित्र धागा और सफ़ेद वस्त्र अर्पित करें। इस दिन ऋषि पंचमी व्रत कथा(Vrat Katha) का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। 

  • भोग में तेल का दीपक, अगरबत्ती, मिठाई और फल चढ़ाएँ। 
      
  • कई जगहों पर, ये सभी अनुष्ठान किसी पवित्र नदी या जलाशय के तट पर किए जाते हैं। 
      
  • इस दिन आमतौर पर महिलाएं कठोर उपवास(fast) रखती हैं और कोई भी अनाज नहीं खातीं। 
      
  • ऋषि पंचमी से संबंधित कुछ मंत्रों का जाप करके, आरती करके और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बाँटकर पूजा का समापन करें। 

  • इसके अलावा, गरीबों में कुछ भोजन और वस्त्र बाँटें क्योंकि इसे बहुत शुभ माना जाता है और यह फलदायी होता है।

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🍀 ऋषि पंचमी के पीछे की कहानी(The Story Behind Rishi Panchami):🍀    
 

                        परंपरा के अनुसार, एक बार विदर्भ देश में एक ब्राह्मण अपनी समर्पित पत्नी के साथ रहता था। ब्राह्मण के एक बेटा और एक बेटी थी। उसने अपनी बेटी का विवाह एक सुसंस्कृत ब्राह्मण व्यक्ति से किया, लेकिन लड़की के पति की असामयिक मृत्यु हो गई, जिससे लड़की विधवा का जीवन जीने लगी। वह अपने पिता के घर वापस आ गई और फिर से वहीं रहने लगी। कुछ दिनों बाद, लड़की के पूरे शरीर में कीड़े हो गए। इससे उसे परेशानी होने लगी। इससे उसके माता-पिता चिंतित हो गए और समस्या का समाधान खोजने के लिए ऋषि(Rishi) के पास गए। 

  
                       ज्ञानी ऋषि ने ब्राह्मण की बेटी के पिछले जन्मों के बारे में जानकारी ली। ऋषि ने ब्राह्मण और उसकी पत्नी को बताया कि उनकी बेटी ने अपने पिछले जन्म में एक धार्मिक नियम का उल्लंघन किया था। उसने मासिक धर्म के दौरान रसोई के कुछ बर्तनों को छू लिया था। इस प्रकार, उसने पाप को आमंत्रित किया था जो उसके वर्तमान जन्म में परिलक्षित हो रहा था।

 

                    पवित्र शास्त्रों में कहा गया है कि मासिक धर्म के दौरान एक महिला को धार्मिक चीजों और रसोई के बर्तनों को नहीं छूना चाहिए। ऋषि ने उन्हें आगे बताया कि लड़की ने ऋषि पंचमी व्रत नहीं किया था, इसलिए उसे ये परिणाम भुगतने पड़े। ऋषि ने ब्राह्मण को यह भी बताया कि यदि लड़की पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ ऋषि पंचमी का व्रत रखे और अपने पापों की क्षमा मांगे, तो वह अपने पिछले कर्मों से मुक्त हो जाएगी और उसके शरीर पर मौजूद कीड़े भी नहीं रहेंगे। लड़की ने वैसा ही किया जैसा उसके पिता ने उसे करने को कहा था और वह कीड़ों से मुक्त हो गई।

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💐ऋषि पंचमी पर किस भगवान की पूजा की जाती है(Which God is worshipped on Rishi Panchami)?: 💐  

                     इस दिन मुख्य रूप से सप्त ऋषियों(Sapta Rishis) की पूजा की जाती हैवे हैं:     
             
कश्यप ऋषि(Kashyap Rishi): समस्त प्राणियों के जनक, ब्रह्मा के मानस पुत्र

अत्रि ऋषि(Atri Rishi): ब्रह्मा के मानस पुत्र, ऋग्वेद(Rigveda) के रचयिता 

भारद्वाज ऋषि(Bhardwaj Rishi): आयुर्वेद और वेदों के महान ज्ञाता 

विश्वामित्र ऋषि(Vishwamitra Rishi): राजा से ब्रह्मर्षि बने, गायत्री मंत्र(Gayatri Mantra) के रचयिता 

गौतम ऋषि(Gautam Rishi): धर्मशास्त्रों के रचयिता, अहिल्या के पति

जमदग्नि ऋषि(Jamadagni Rishi): परशुराम के पिता, घोर तपस्वी  

वशिष्ठ ऋषि(Vashishtha Rishi): इक्ष्वाकु वंश के राजगुरु, श्रीराम के कुलगुरु 

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🙏 ऋषि पंचमी व्रत में क्या खाएं(What to Eat in Rishi Panchami Vrat)?🙏 


                      हर संस्कृति के साथ ऋषि पंचमी(Rishi Panchami) पर खाने की परंपरा बदलती रहती है। पहले के दिनों में, भक्त अनाज से बने भोजन के बजाय जमीन के नीचे उगने वाले फलों का सेवन करते थे। यह दिन जैनियों(Jains) के लिए महत्वपूर्ण है। चूंकि जैन धर्म में दो संप्रदाय हैं, श्वेतांबर पंथ(the Shwetambar school) ऋषि पंचमी को परशुजन महापर्व के अंत के रूप में मनाता है जबकि दिगंबर पंथ(the Digambar school) इस दिन को महापर्व की शुरुआत के रूप में मानता है। 
  

                        महाराष्ट्र में, इस दिन एक विशेष भोजन पकाया जाता है जिसे ऋषि पंचमी भाजी के रूप में जाना जाता है। इसे मौसमी सब्जियों के साथ पकाया जाता है। आमतौर पर, इस व्यंजन को बनाते समय कंद का उपयोग किया जाता है। यह भाजी एक तरह से पकाई जाती है, जिस तरह से ऋषि बनाते थे यानी सादा और बिना मसाले के। ऋषि पंचमी के दिन, व्रत रखने वाले भक्त व्रत खोलने के लिए इस भाजी का सेवन करते हैं।


                       इस भाजी की मुख्य सामग्री है अमरनाथ के पत्ते(amaranth leaves)- चवली(chawli), हाथी पांव रतालू- सूरन( snake foot yam), शकरकंद(sweet potato), आलू(potatoes), चिचिंडा(snake gourd), मूंगफली, कद्दू, अरबी के पत्ते(colocasia leaves) और कच्चा केला(raw banana)। ये सभी सब्जियाँ गैस स्टोव पर बर्तनों में पकाई जाती हैं। पहले लोग इस भाजी को मिट्टी के बर्तनों में पकाते थे, आजकल इसकी जगह धातु के बर्तनों ने ले ली है। इस प्रकार, ऋषि पंचमी व्रत ऋषियों की निस्वार्थ मेहनत को समर्पित है। यह एक ऐसा दिन है जो भक्तों को अपने मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने का अवसर देता है। यह पूरे दिन उपवास के माध्यम से पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है। 

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🍀Mantras of Rishi Panchami:🍀


कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोय गौतम:।  

जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋ षय: स्मृता: ॥ 

गृन्त्व‌र्ध्य मया दत्तं तुष्टा भवतु मे सदा ॥ 

  
Kasyapotrirbhardvajo Vishwamitroy Gautam:  

Jamadagnirvasisthashcha saptaite rishayah smritaah. 

Gruntvdhry maya datam tushta bhavatu me sada. 

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💐निष्कर्ष(Conclusion): 💐

                 ऋषि पंचमी(Rishi Panchami) केवल एक अनुष्ठानिक अनुष्ठान से कहीं अधिक है; यह हिंदू संस्कृति के आध्यात्मिक आधार को आकार देने वाले प्राचीन ऋषियों के ज्ञान और निस्वार्थ योगदान का सम्मान करने का एक पवित्र अवसर हैयह हमें सच्ची भक्ति और अटूट विश्वास के साथ इस त्योहार के गहन आध्यात्मिक महत्व में डूबने के लिए आमंत्रित करता हैयह त्योहार ऋषियों के अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेने का एक अनुस्मारक है, जिनकी शिक्षाएँ हमारे पथ का मार्गदर्शन और प्रकाश करती रहती हैं ऋषि पंचमी के सार को अपनाने से हमें आंतरिक सद्भाव और आध्यात्मिक ज्ञान का पोषण करने का अवसर मिलता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि इन पवित्र मूल्यों को संजोया जाए और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया जाए, इस प्राचीन परंपरा की ज्योति को जीवित रखते हुए 

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