shrimadbhagvatam.org

Latest Post

🌼 वरलक्ष्मी व्रतम 🌼

॥ ॐ श्री परमात्मने नमः ॥

🚩वरलक्ष्मी व्रतम 2025 🚩

वरलक्ष्मी व्रत के बारे में(About Varalakshmi Vrat):

          वरलक्ष्मी व्रत(Varalakshmi Vrat) श्रावण शुक्ल पक्ष के अंतिम शुक्रवार(Friday) को मनाया जाता है और यह राखी और श्रावण पूर्णिमा से कुछ दिन पहले आता है। वरलक्ष्मी व्रत केवल महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि पुरुषों के लिए भी सुझाया जाता है। हालाँकि, आंध्र, तेलंगाना और महाराष्ट्र क्षेत्रों में, वरलक्ष्मी व्रत मुख्य रूप से केवल विवाहित महिलाओं द्वारा ही किया जाता है। वरलक्ष्मी व्रत सांसारिक सुखों की कामना से किया जाता है और इसमें बच्चे, जीवनसाथी, विलासिता और सभी प्रकार के सांसारिक सुख शामिल होते हैं। 

           वरलक्ष्मी व्रतम आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में बहुत लोकप्रिय व्रत और पूजा दिवस है। इन राज्यों में, वरलक्ष्मी(Varalakshmi) पूजा ज्यादातर विवाहित महिलाओं द्वारा पति और परिवार के अन्य सदस्यों की भलाई के लिए की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवी वर-लक्ष्मी की पूजा करना अष्टलक्ष्मी यानी धन (श्री), पृथ्वी (भू), विद्या (सरस्वती), प्रेम (प्रीति), यश (कीर्ति), शांति (शांति), आनंद (तुष्टि) और शक्ति (पुष्टि) की आठ देवियों की पूजा के बराबर है। 


            हालाँकि, उत्तर भारतीय राज्यों में वरलक्ष्मी पूजा दक्षिण भारतीय राज्यों की तरह लोकप्रिय नहीं है। वरलक्ष्मी व्रतम देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए सबसे उपयुक्त दिनों में से एक है। 

 ***


🕰️ Varalakshmi Vratam 2025 Date & Time:📅

 

वरलक्ष्मी व्रतम शुक्रवार, 8 अगस्त 2025 को 

सिंह लग्न पूजा मुहूर्त (सुबह) – 06:55 से 09:05 तक 

अवधि – 02 घंटे 10 मिनट 

वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त (दोपहर) – 13:27 से 15:42 तक 

अवधि – 02 घंटे 15 मिनट 

कुंभ लग्न पूजा मुहूर्त (शाम) – 19:36 से 21:11 तक 

अवधि – 01 घंटा 35 मिनट 

वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त (मध्यरात्रि) – 00:25 से 02:24, अगस्त 09 

अवधि – 01 घंटा 59 मिनट 

 ***

💐वरलक्ष्मी व्रत का महत्व(Significance Of Varalakshmi Vratham):💐

                वरलक्ष्मी व्रत का मुख्य उद्देश्य देवी लक्ष्मी से सच्ची प्रार्थना करके दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करना है। इस व्रत को करने के लिए कोई सख्त नियम नहीं हैं। अनुष्ठान कठोर नहीं हैं और देवी वरलक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए एक साधारण प्रार्थना भी पर्याप्त है। 

  
                जैसा कि हिंदू पौराणिक कथाओं में उल्लेख किया गया है, देवी लक्ष्मी समृद्धि, धन, भाग्य, ज्ञान, प्रकाश, उदारता, साहस और प्रजनन क्षमता की अधिष्ठात्री देवी हैं। महिलाएँ, विशेष रूप से विवाहित महिलाएँ, देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने और उनकी दिव्य कृपा प्राप्त करने के लिए यह व्रत करती हैं। महिलाएँ अपने-अपने पति की लंबी आयु के लिए देवी से प्रार्थना करती हैं और अच्छी संतान के लिए आशीर्वाद भी मांगती हैं। वरलक्ष्मी व्रत मुख्य रूप से महिलाओं का त्योहार है और इसे केवल महिलाएँ ही मनाती हैं। वरलक्ष्मी व्रत का महत्व ‘स्कंद पुराण’ में बताया गया है। 

***

🌲वरलक्ष्मी पूजा के लिए सामग्री(Materials for Varalakshmi Puja Vidhi)🌲

               जब भी हम किसी भी देवी – देवताओं की पूजा करते है या किसी के द्वारा पूजा करवाते है तो पूजा के लिए कुछ आवश्यक सामग्री की जरूरत होती है| आज हम उन्ही सामग्री के बारे में जानेंगे । 
  

देवी वरलक्ष्मी की मूर्ति(Idol of Goddess Varalakshmi,),  फूल माला(Flower garland), हल्दी(Turmeric), कुमकुम(Kumkum),  चन्दन का पाउडर(Sandalwood powder),  विभूति(Vibhuti,),  शीशा(Mirror), आम पत्र(Mango leaves),  कंघी(Comb),  फूल(Flower),  पान के पत्ते(Betel leaves),  पंचामृत(Panchamrit),  केला(Banana),  दही(Curd),  दूध(Milk), अगरबत्ती( Incense sticks),  मौली(Mauli), पानी(Water), कर्पुर(Karpur),  पूजा की घंटी(Puja bell),  प्रसाद(Prasad),  तेल का दीपक(Oil lamp),  अक्षत(Akshat). 

  ***

🍀वरलक्ष्मी व्रत  पूजा विधि(Varalakshmi Vrat Puja Vidhi):🍀

  • सर्वप्रथम सुबह जल्दी उठकर स्नान करके माता लक्ष्मी को नमन कीजिये और सफ़ेद रंग के वस्त्र धारण कीजिये

  • जहाँ आप पूजा करे उस जगह पर चॉक की सहायता से रंगोली बनाना चाहिए

  • घर के सभी कोनों में गंगाजल का छिड़काव करके घर की शुद्धि करें और व्रत का संकल्प ले

  • देवी मां की प्रतिमा को अच्छे से वस्त्र पहना कर आभूषण व कुमकुम से माता का शृंगार करें 

  • एक चौकी लीजिये उसपर लाल कपड़ा बिछाए और गणेश जी के साथ माता रानी की प्रतिमा को स्थापित कीजिये 

  • इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि माँ लक्ष्मी की प्रतिमा का मुख पूर्व दिशा की ओर है| यह भक्त के लिए बहुत लाभदायक होता है 

  • पूजा वाली जगह पर थोड़े से चावल फैला दे 

  • इसके बाद एक कलश ले और उसके चारों ओर चन्दन का लेप करें 

  • कलश को आधे से ज्यादा चावल से भर दीजिये

  • उसके पश्चात कलश में पान के पत्ते, चांदी का सिक्का और खजूर डालिए 

  • एक नारियल पर चन्दन,कुमकुम लगाकर उसे कलश के ऊपर रखिए 

  • कलश के ऊपर रखे हुए नारियल के चारों ओर आम के पत्ते लगाये 

  • एक थाली लेकर उसमे नया लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उसे चावल के ऊपर रख दे 

  • देवी माँ की प्रतिमा के सामने तेल का दीपक अवश्य लगाये 

  • गणेश जी के सामने घी का दीपक जलाएं 

  • कलश और अक्षत से माँ वरलक्ष्मी का स्वागत कीजिये 

  • देवी माँ को चंदन पाउडर, कुमकुम, इत्र, फूलों की माला, हल्दी, धूप, कपड़े और मिठाई अर्पित कीजिये 

  • देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मंत्र का जप कीजिये 

  • वरलक्ष्मी व्रत की कथा पढ़े और देवी माँ की आरती करें

  • पूजा का समापन होने के बाद देवी माँ को भोग लगाएं और प्रसाद का वितरण कीजिये 

***

🌻 वरलक्ष्मी प्रसादम या प्रसाद में क्या होता है(What is there in Varalakshmi Prasadam or Prasad)?🌻 
     
                 

             पूजा के दौरान कई तरह के व्यंजन पेश किए जाते हैं जैसे चावल के आटे का दलिया, गुड़ की मिठाई, उबली हुई फलियाँ आदि। प्रसाद आमतौर पर केले के पत्तों से बनाया जाता है और पूजा करते समय मूर्तियों के सामने रखा जाता है। वरलक्ष्मी पूजा पूरी होने के बाद, प्रसाद को विवाहित महिलाओं, बच्चों और अन्य सभी आमंत्रित लोगों में वितरित किया जाता है। 

  
            शाम को, भक्त वरलक्ष्मी आरती के साथ समापन पूजा करते हैं और फिर आकांक्षी भोजन ग्रहण करके अपना उपवास समाप्त कर सकते हैं। शाम को विवाहित महिलाओं को आमंत्रित किया जाता है और उन्हें कुछ उपहार दिए जाते हैं। 

 ***

🍀Mantras of Varalakshmi Vratham:🍀

 
  ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभायो नमः॥

 Om Hreem Shreem Lakshmibhayo Namah.


या श्री: स्वयं सुकृतिना भवनेश्वलक्ष्मी:। 

पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धि: ॥ 

  श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा ।

तां त्वां नता: स्म परिपालय देवि विश्वम ॥


Ya Shri: Svayam Sukritina Bhavaneshvalakshmi. 

papatmnam krutdhiyam hardyeshu budhhi.

shraddha satam kuljanaprabhavasya lajja.

tam tvaam nata: sm paripalaya devi vishvam.

 ***

💐Conclusion 💐

                   वरालक्ष्मी पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह कृतज्ञता, प्रचुरता और भक्ति का उत्सव हैयह प्रिय त्योहार परिवारों को एक साथ लाता है और एकता और विश्वास की भावना पैदा करता हैअपनी विस्तृत सजावट, अगरबत्ती की सुगंध और अपने प्रतिभागियों की भक्ति के माध्यम से, वरलक्ष्मी पूजा उन सभी लोगों तक अपना महत्व और आशीर्वाद पहुंचाती है जो इसे ईमानदारी और खुशी के साथ मनाते हैं 

***