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🌼 नाग पंचमी 🌼

॥ ॐ श्री परमात्मने नमः ॥

🚩 नाग पंचमी 2025 🚩

नाग पंचमी के बारे में(About nag panchmi):

              नाग पंचमी भारत, नेपाल और अन्य देशों में हिंदुओं द्वारा मनाई जाने वाली नागों की एक पारंपरिक पूजा है जहाँ हिंदू अनुयायी रहते हैंहिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह पूजा श्रावण (जुलाई/अगस्त) के चंद्र महीने के शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन की जाती हैलोग मिट्टी से सांप बनाते हैं, उन्हें अलग-अलग रूप और रंग देते हैंइन नाग प्रतिमाओं को एक मंच पर रखा जाता है और दूध चढ़ाया जाता हैमहाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में, नाग-देवताओं के स्थायी मंदिर हैं और धूमधाम और भव्यता के साथ विशेष पूजा की जाती हैइस दिन सपेरों का भी विशेष महत्व है, क्योंकि उन्हें दूध और पैसे चढ़ाए जाते हैंइस दिन ज़मीन खोदना सख्त मना हैपश्चिम बंगाल में, हिंदू इस तिथि पर नाग-देवीअष्ट नागके साथदेवी मनशाकी पूजा करते हैं 

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🕰️Nag Panchami 2025 Date & Time:📅

नाग पंचमी – मंगलवार, 29 जुलाई 2025 को 

नाग पंचमी पूजा मुहूर्त- 06:11 से 08:49 तक 

अवधि – 02 घंटे 38 मिनट 

गुजरात में नाग पंचम तिथि – बुधवार, 13 अगस्त 2025 

पंचमी तिथि प्रारम्भ – 28 जुलाई 2025 को 23:24 बजे से 

पंचमी तिथि समाप्त – 30 जुलाई, 2025 को 00:46 बजे 

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💐नाग पंचमी महत्व(Nag Panchami Significance):💐

               श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी व्रत या उपवास रखा जाता हैगरुड़ पुराण के अनुसार, प्रवेश द्वार (घर के) के दोनों ओरनागकी तस्वीर बनाकर उसकी पूजा करनी चाहिएइसेभिट्टी चित्रे नाग पूजाके नाम से भी जाना जाता हैमहिलाएं ब्राह्मणों को भोजन, लड्डू और खीर (चावल, दूध और चीनी के मिश्रण से बना एक विशिष्ट व्यंजन) चढ़ाती हैंऐसा ही भोजन साँपों और सपेरों को भी दिया जाता है 

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🍀नाग पंचमी त्यौहार पर दूध का महत्व(Significance Of Milk on Nag Panchami Festival):🍀

                सांपों को दूध पिलाने के बारे में एक महत्वपूर्ण कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी है। देवताओं और असुरों द्वारा अमृत की खोज में, समुद्र से अलकटूम नामक एक घातक विष निकला। इसमें पूरे ब्रह्मांड को मिटाने की शक्ति है। भगवान शिव ने ब्रह्मांड को बचाने के लिए विष पी लिया। पीते समय, कुछ बूंदें धरती पर गिर गईं, जिन्हें उनके सांपों ने पी लिया। देवताओं ने विष के प्रभाव को शांत करने के लिए नीलकंठ और सांपों पर गंगा अभिषेक किया। इसलिए, नाग पंचमी पूरी पौराणिक प्रक्रिया का प्रतिनिधित्व करती है। 

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🌻 नाग पंचमी पूजा विधि(Naag Panchami Puja Vidhi):🌻            

               

            नाग पंचमी की पूजा का नियम सभी का अलग होता हैं, कई तरह की मान्यता होती हैं. एक तरह की नाग पंचमी पूजा विधि यहाँ दी गई हैं. 

  

  • सबसे पहले सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान किया जाता हैं. निर्मल स्वच्छ वस्त्र पहने जाते हैं. 

  • भोजन में सभी के अलग नियम होते हैं, एवं उन्ही के अनुसार भोग लगाया जाता हैं. कई घरों में दाल बाटी बनती हैं. कई लोगों के यहाँ खीर पुड़ी बनती हैं. कईयों के यहाँ चांवल बनाना गलत माना जाता हैं. कई परिवार इस दिन चूल्हा नहीं जलाते अतः उनके घर बासा खाने का नियम होता हैं. इस तरह सभी अपने हिसाब से भोग तैयार करते हैं. 

  • इसके बाद पूजा के लिए घर की एक दीवार पर गेरू, जोकि एक विशेष पत्थर है से लेप कर यह हिस्सा शुद्ध किया जाता हैं. यह दीवार कई लोगों के घर की प्रवेश द्वार होती हैं तो कई के रसोई घर की दीवार. इस छोटे से भाग पर कोयले एवं घी से बने काजल की तरह के लेप से एक चौकोर डिब्बा बनाया जाता हैं. इस डिब्बे के अन्दर छोटे छोटे सर्प बनाये जाते हैं. इस तरह की आकृति बनाकर उसकी पूजा की जाती हैं. 

  • कई परिवारों में यह सर्प की आकृति कागज पर बनाई जाती हैं. 

  • कई परिवार घर के द्वार पर चन्दन से सर्प की आकृति बनाते हैं, एवं पूजा करते हैं.
     
  • इस पूजा के बाद घरों में सपेरे को लाया जाता हैं जिनके पास टोकनी में सर्प होता हैं, जिसके दांत नहीं होते साथ ही इनका जहर निकाल दिया जाता हैं. उनकी पूजा की जाती हैं. उन्हें अक्षत, पुष्प, कुमकुम चढ़ाकर दूध एवं भोजन का भोग लगाया जाता हैं. 

  • इस दिन सर्प को दूध पिलाने की प्रथा हैं. साथ ही सपेरे को दान दिया जाता हैं. 

  • कई लोग इस दिन कीमत देकर सर्प को सपेरे के बंधन से मुक्त भी कराते हैं. 

  • इस दिन बाम्बी के भी दर्शन किये जाते हैं. बाम्बी सर्प के रहने का स्थान होता हैं. जो मिट्टी से बना होता हैं, उसमे छोटे- छोटे छिद्र होते हैं. यह एक टीले के समान दिखाई देता हैं. 

  • इस प्रकार नाग पंचमी की पूजा की जाती हैं. फिर सभी परिवारजनों के साथ मिलकर भोजन करते हैं. 

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🍀Mantras of Nag Panchami:🍀
 

सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले। 

ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥ 

ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः। 

ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥ 

 

sarve nāgāḥ prīyantāṃ me ye kecit pṛthvītale। 

ye ca helimarīcisthā ye’ntare divi saṃsthitāḥ॥ 

ye nadīṣu mahānāgā ye sarasvatigāminaḥ। 

ye ca vāpītaḍageṣu teṣu sarveṣu vai namaḥ॥ 

  
मंत्र अनुवाद – इस संसार में, आकाश, स्वर्ग, झीलें, कुएँ, तालाब तथा सूर्य की किरणों में निवास करने वाले सर्प, हमें आशीर्वाद दें तथा हम सभी आपको बारम्बार नमन करते हैं।

  

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्। 

शङ्ख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥ 

एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्। 

सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः। 

तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥ 

 

anantaṃ vāsukiṃ śeṣaṃ padmanābhaṃ ca kambalam। 

śaṅkha pālaṃ dhṛtarāṣṭraṃ takṣakaṃ kāliyaṃ tathā॥ 

etāni nava nāmāni nāgānāṃ ca mahātmanām। 

sāyaṅkāle paṭhennityaṃ prātaḥkāle viśeṣataḥ। 

tasya viṣabhayaṃ nāsti sarvatra vijayī bhavet॥ 

  

मंत्र अनुवाद – नौ नाग देवताओं के नाम अनंत, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कंबला, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिया हैं। यदि प्रतिदिन सुबह नियमित रूप से इनका जाप किया जाए तो यह आपको सभी बुराइयों से सुरक्षित रखेगा और आपको जीवन में विजयी बनाएगा।

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💐निष्कर्ष(Conclusion) 💐
              

              नाग पंचमी एक ऐसा त्यौहार है जो नाग देवताओं के प्रति भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। प्रार्थना, अनुष्ठान और उपवास के माध्यम से, भक्त नाग देवताओं का आशीर्वाद और सुरक्षा चाहते हैं, जिससे उनके परिवारों का कल्याण और समृद्धि सुनिश्चित होती है। चाहे पारंपरिक प्रसाद के माध्यम से हो या क्षेत्रीय विविधताओं के माध्यम से, नाग पंचमी का सार हिंदू धर्म की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रथाओं का प्रमाण है। 

  
             राजा जनमजेय के सर्प यज्ञ की कथा इन प्राणियों के साथ शत्रुता के बजाय श्रद्धा और सद्भाव के महत्व पर जोर देती है। यह कहानी क्रोध के परिणामों और सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा की आवश्यकता की याद दिलाती है, भक्तों को सांपों का सम्मान करने और उन्हें नष्ट करने के बजाय उनकी रक्षा करने के लिए प्रोत्साहित करती है। 

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