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🌼 इंदिरा एकादशी 🌼

॥ ॐ श्री परमात्मने नमः ॥

🚩   इंदिरा एकादशी 2025 🚩

इंदिरा एकादशी के बारे में(About Indira Ekadashi):

               इंदिरा एकादशी(Indira Ekadashi), जिसे “एकादशी श्राद्ध(Ekadashi Shraddh)” भी कहा जाता है, पितृ पक्ष, यानी पूर्वजों को समर्पित पखवाड़े के दौरान आती है। इस एकादशी व्रत का मुख्य उद्देश्य मृत पूर्वजों या पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करना है, ताकि उन्हें नरक में कष्ट न सहना पड़े। हिंदू लोग इंदिरा एकादशी का व्रत पिछले पापों की क्षमा याचना के लिए करते हैं। भगवान विष्णु(Lord Vishnu) के भक्त उनका प्रेम और स्नेह पाने के लिए इंदिरा एकादशी का व्रत रखते हैं। 

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🕰️Indira Ekadashi 2025 Date & Time:📅

इंदिरा एकादशी  – 17 सितंबर 2025, बुधवार को 

पारण का समय – 18 सितंबर, प्रातः 06:26 बजे से प्रातः 08:53 बजे तक 

पारण दिवस द्वादशी समाप्ति क्षण – रात्रि 11:24 बजे 

एकादशी तिथि आरंभ – 17 सितंबर, 2025 को 12:21 पूर्वाह्न 

एकादशी तिथि समाप्त – 17 सितंबर, 2025 को रात्रि 11:39 बजे 

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💐इंदिरा एकादशी का महत्व(Significance Of Indira Ekadashi):💐
  

                        इंदिरा एकादशी(Indira Ekadashi) व्रत एक महत्वपूर्ण हिंदू अनुष्ठान है जो व्यक्ति को समृद्धि  का आशीर्वाद देता है। इस शुभ व्रत को करने से व्यक्ति सभी पापों को धो सकता है और अपने पूर्वजों को उनके जीवनकाल में किए गए पापों के दुष्प्रभावों से भी मुक्त कर सकता है। इसलिए जो व्यक्ति अपने पूर्वजों को सभी अपराधों से मुक्त करना चाहता है और अंततः उन्हें शांति प्रदान करना चाहता है, उसे इंदिरा एकादशी व्रत को पूरी निष्ठा के साथ रखना चाहिए। 

  
                हिंदू शास्त्रों में कहा गया है कि इंदिरा एकादशी व्रत रखने से भक्तों को ‘अश्वमेध यज्ञ(Ashwamedha Yagya)’ करने के समान फल मिलते हैं। यह अन्य एकादशी व्रतों की तुलना में इस एकादशी व्रत के महत्व को दर्शाता है। इंदिरा एकादशी का और भी अधिक महत्व ‘ब्रह्मवैवर्त पुराण(Brahmavaivarta Purana)’ में पढ़ा जा सकता है और इसे भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को भी बताया है। 

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🍀इंदिराएकादशी के अनुष्ठान(Rituals of Indira Ekadashi):🍀

  • इंदिरा एकादशी(Indira Ekadashi) के दिन, इस व्रत को करने वाले लोग श्राद्ध कर्म करते हैं। भक्तों को अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए पूरे अनुष्ठान का पालन करते हुए व्रत का पालन करना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु( Lord Vishnu) की मूर्ति की पूजा की जाती है। भक्तगण मूर्ति को तुलसी के पत्ते, फूल और फल के साथ-साथ अन्य पूजा सामग्री भी अर्पित करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु(Lord Vishnu) के किसी मंदिर में भी जाना चाहिए।
     
  • इंदिरा एकादशी का व्रत एक दिन पहले यानी दशमी (10वें दिन) से शुरू होता है। दशमी के दिन मृत पूर्वजों के लिए अनुष्ठान किए जाते हैं और प्रार्थना की जाती है। भोजन सूर्योदय से पहले ही किया जाता है क्योंकि एकादशी के दिन भक्त कठोर उपवास रखते हैं। व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और अगले दिन द्वादशी को भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद समाप्त होता है।  यह पितृ पक्ष के दिन पड़ता है, इसलिए खाने से पहले पुजारियों और गायों को भोजन दिया जाता है। 

  • इंदिरा एकादशी के दिन भक्त सूर्योदय से पहले उठ जाते हैं। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और भगवान की स्तुति में वैदिक मंत्र(Vedic mantras) और भजन गाए जाते हैं। इस व्रत को करने वाले को पूरी रात जागकर भक्ति गीत गाने चाहिए और भगवान विष्णु की कथा सुननी चाहिए। ‘विष्णु सहस्त्रनाम(Vishnu Sahastranaam)’ का पाठ करना भी सौभाग्यशाली माना जाता है। 
     
  • इस दिन मृत पूर्वजों की याद में विशेष अनुष्ठान और प्रार्थना की जाती है। पितरों की प्रार्थना के लिए दोपहर का समय अनुकूल माना जाता है। 

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🌻 इंदिरा एकादशी पर क्याकरें(What not to do in Indira Ekadashi)?🌻 

 
  • एकादशी के दिन किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन वर्जित है। 

  • इंदिरा एकादशी के दिन भोग-विलास से दूर रहना चाहिए। 

  • एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। 

  • एकादशी के दिन घर में झाड़ू-पोछा नहीं करना चाहिए। 

  • एकादशी के दिन बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना आदि नहीं चाहिए। 

  • एकादशी के दिन यथासंभव मौन रहना चाहिए। 

  • वाणी कम से कम बोलनी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो अत्यंत विनम्र होनी चाहिए। 

  • झूठ बोलना(Lying), निंदा करना(slandering), चोरी करना(stealing), क्रोध करना(anger) आदि से बचना चाहिए। 

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🍀 इंदिरा एकादशी के लाभ(Benefits of Indira Ekadashi):🍀 


आध्यात्मिक उत्थान(Spiritual Upliftment): भगवान विष्णु के साथ आध्यात्मिक बंधन को मज़बूत करने, पापों का शमन करने और इंदिरा एकादशी का व्रत रखने से आत्मा की शुद्धि में मदद मिलती है। 

  
पितरों की मुक्ति(Liberation of Ancestors): इस एकादशी का मुख्य लाभ मृत आत्माओं की मुक्ति है, जिन्हें उनके वंशजों द्वारा चेतना को शांति प्रदान करने में सहायता मिलती है। 

  
पापों का निवारण(Removal of Sins): इंदिरा एकादशी के दिन उपवास का बहुत महत्व है क्योंकि इससे उपासक को पापों की क्षमा जैसे कई लाभ मिलते हैं। 

  
भगवान विष्णु का आशीर्वाद(Blessings of Lord Vishnu): ऐसा कहा जाता है कि पूरा दिन भगवान विष्णु की पूजा में समर्पित करने से भक्तों को दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे उन्हें अधिक समृद्धि और खुशी मिलती है।

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💐 इंदिरा एकादशी पूजा विधि(Indira Ekadashi  Puja Vidhi): 💐  


  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। 

  • भगवान विष्णु के शालिग्राम(Shaligram) स्वरूप का ध्यान करें। 

  • कुमकुम से कपड़े पर स्वस्तिक बनाएं। 

  • भगवान गणेश को प्रणाम करके “ॐ गणेशाय नमः(Om Ganeshaya Namah)” का जाप करते हुए स्वस्तिक पर फूल और चावल चढ़ाएं। 

  • फिर घर के मंदिर में शालिग्राम या भगवान विष्णु की तस्वीर स्थापित करें। 

  • भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर पर गंगाजल डालकर विष्णु पूजा करें। 

  • रोली, चंदन, अक्षत, धूपबत्ती, मिठाई आदि चढ़ाएं। 

  • विष्णु सहस्रनाम(Vishnu Sahasranama) का पाठ करें और आरती करें। 

  • शाम को तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं। 

  • इंदिरा एकादशी व्रत की कथा(story) सुनें।
     
  • पितरों के नाम पर श्राद्ध करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
     
  • द्वादशी के दिन फल खाकर व्रत का समापन करें।

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🍀Mantras of Indira Ekadashi:🍀
 

 
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

Om Namo Bhagwate Vasudevaya. 

 
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।

  हे नाथ नारायण वासुदेवाय।। 

 Shri Krishna Govind Hare Murare.  

he Nath Narayan Vasudevay. 

 
ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

Om Narayanaya Vidmahe. Vasudevaya dhimahi. Tanno Vishnu Prachodayat.

 
ॐ विष्णवे नम:।

Om Vishnave Namah. 

 
ॐ हूं विष्णवे नम:।

Om Hoon Vishnave Namah.

 
ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि। 

Om Namo Narayan. Shri Man Narayan Narayan Hari Hari. 

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💐निष्कर्ष(Conclusion) 💐

                       इंदिरा एकादशी(Indira Ekadashi) भगवान विष्णु के भक्तों के लिए एक पवित्र दिन है जो आध्यात्मिक चिंतन, भक्ति और अनुष्ठानों के पालन का समय है। इस दिन किए जाने वाले व्रत और अनुष्ठान, जैसे एकादशी व्रतोद्यापन पूजा और उद्यापन अनुष्ठान, आशीर्वाद, शुद्धि और ईश्वर से घनिष्ठ संबंध स्थापित करने वाले माने जाते हैं। पूजा की सामग्री की सावधानीपूर्वक तैयारी से लेकर ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराने जैसे दान-पुण्य तक, ये परंपराएँ निस्वार्थता और धर्मपरायणता का सार प्रस्तुत करती हैं। जब भक्त श्रद्धा और ईमानदारी के साथ इन अनुष्ठानों में संलग्न होते हैं, तो इंदिरा एकादशी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान से कहीं अधिक हो जाती है; यह आध्यात्मिक ज्ञान और पूर्णता की ओर एक गहन यात्रा में परिवर्तित हो जाती है। 

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