इंदिरा एकादशी(Indira Ekadashi), जिसे “एकादशी श्राद्ध(Ekadashi Shraddh)” भी कहा जाता है, पितृ पक्ष, यानी पूर्वजों को समर्पित पखवाड़े के दौरान आती है। इस एकादशी व्रत का मुख्य उद्देश्य मृत पूर्वजों या पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करना है, ताकि उन्हें नरक में कष्ट न सहना पड़े। हिंदू लोग इंदिरा एकादशी का व्रत पिछले पापों की क्षमा याचना के लिए करते हैं। भगवान विष्णु(Lord Vishnu) के भक्त उनका प्रेम और स्नेह पाने के लिए इंदिरा एकादशी का व्रत रखते हैं।
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इंदिरा एकादशी – 17 सितंबर 2025, बुधवार को
पारण का समय – 18 सितंबर, प्रातः 06:26 बजे से प्रातः 08:53 बजे तक
पारण दिवस द्वादशी समाप्ति क्षण – रात्रि 11:24 बजे
एकादशी तिथि आरंभ – 17 सितंबर, 2025 को 12:21 पूर्वाह्न
एकादशी तिथि समाप्त – 17 सितंबर, 2025 को रात्रि 11:39 बजे
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इंदिरा एकादशी(Indira Ekadashi) व्रत एक महत्वपूर्ण हिंदू अनुष्ठान है जो व्यक्ति को समृद्धि का आशीर्वाद देता है। इस शुभ व्रत को करने से व्यक्ति सभी पापों को धो सकता है और अपने पूर्वजों को उनके जीवनकाल में किए गए पापों के दुष्प्रभावों से भी मुक्त कर सकता है। इसलिए जो व्यक्ति अपने पूर्वजों को सभी अपराधों से मुक्त करना चाहता है और अंततः उन्हें शांति प्रदान करना चाहता है, उसे इंदिरा एकादशी व्रत को पूरी निष्ठा के साथ रखना चाहिए।
हिंदू शास्त्रों में कहा गया है कि इंदिरा एकादशी व्रत रखने से भक्तों को ‘अश्वमेध यज्ञ(Ashwamedha Yagya)’ करने के समान फल मिलते हैं। यह अन्य एकादशी व्रतों की तुलना में इस एकादशी व्रत के महत्व को दर्शाता है। इंदिरा एकादशी का और भी अधिक महत्व ‘ब्रह्मवैवर्त पुराण(Brahmavaivarta Purana)’ में पढ़ा जा सकता है और इसे भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को भी बताया है।
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🌻 इंदिरा एकादशी पर क्या न करें(What not to do in Indira Ekadashi)?🌻
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आध्यात्मिक उत्थान(Spiritual Upliftment): भगवान विष्णु के साथ आध्यात्मिक बंधन को मज़बूत करने, पापों का शमन करने और इंदिरा एकादशी का व्रत रखने से आत्मा की शुद्धि में मदद मिलती है।
पितरों की मुक्ति(Liberation of Ancestors): इस एकादशी का मुख्य लाभ मृत आत्माओं की मुक्ति है, जिन्हें उनके वंशजों द्वारा चेतना को शांति प्रदान करने में सहायता मिलती है।
पापों का निवारण(Removal of Sins): इंदिरा एकादशी के दिन उपवास का बहुत महत्व है क्योंकि इससे उपासक को पापों की क्षमा जैसे कई लाभ मिलते हैं।
भगवान विष्णु का आशीर्वाद(Blessings of Lord Vishnu): ऐसा कहा जाता है कि पूरा दिन भगवान विष्णु की पूजा में समर्पित करने से भक्तों को दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे उन्हें अधिक समृद्धि और खुशी मिलती है।
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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।
Om Namo Bhagwate Vasudevaya.
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
Shri Krishna Govind Hare Murare.
he Nath Narayan Vasudevay.
ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
Om Narayanaya Vidmahe. Vasudevaya dhimahi. Tanno Vishnu Prachodayat.
ॐ विष्णवे नम:।
Om Vishnave Namah.
ॐ हूं विष्णवे नम:।
Om Hoon Vishnave Namah.
ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।
Om Namo Narayan. Shri Man Narayan Narayan Hari Hari.
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इंदिरा एकादशी(Indira Ekadashi) भगवान विष्णु के भक्तों के लिए एक पवित्र दिन है जो आध्यात्मिक चिंतन, भक्ति और अनुष्ठानों के पालन का समय है। इस दिन किए जाने वाले व्रत और अनुष्ठान, जैसे एकादशी व्रतोद्यापन पूजा और उद्यापन अनुष्ठान, आशीर्वाद, शुद्धि और ईश्वर से घनिष्ठ संबंध स्थापित करने वाले माने जाते हैं। पूजा की सामग्री की सावधानीपूर्वक तैयारी से लेकर ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराने जैसे दान-पुण्य तक, ये परंपराएँ निस्वार्थता और धर्मपरायणता का सार प्रस्तुत करती हैं। जब भक्त श्रद्धा और ईमानदारी के साथ इन अनुष्ठानों में संलग्न होते हैं, तो इंदिरा एकादशी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान से कहीं अधिक हो जाती है; यह आध्यात्मिक ज्ञान और पूर्णता की ओर एक गहन यात्रा में परिवर्तित हो जाती है।
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