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🌼 परिवर्तिनी एकादशी व्रत 🌼

॥ ॐ श्री परमात्मने नमः ॥

🚩 पार्श्‍व एकादशी 2025 🚩

पार्श्‍व एकादशी के बारे में(About Parsva Ekadashi):

                        पार्श्‍व एकादशी(Parsva Ekadashi) पूरे भारत में अपार श्रद्धा और उत्‍साह के साथ मनाई जाती हैइसे देश के विभिन्‍न क्षेत्रों मेंपद्म एकादशी(Padma Ekadashi)’, ‘वामन एकादशी(Vamana Ekadashi)’, ‘जयंती एकादशी(Jayanti Ekadashi)’, ‘जलझिलिनी एकादशी(Jaljhilini Ekadashi)औरपरिवर्तिनी एकादशी(Parivartini Ekadashi)जैसे विभिन्‍न नामों से जाना जाता हैहिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि इस अवधि के दौरान भगवान विष्‍णु विश्राम करते हैं और वे अपनी शयन मुद्रा को बाईं ओर से दाईं ओर कर लेते हैं, और इसलिए इसका नामपार्श्‍व परिवर्तिनी एकादशीपड़ाकुछ जगहों पर, पार्श्‍व एकादशी के दिन भगवान विष्‍णु के अवतार भगवान वामन की पूजा की जाती हैइस एकादशी का पवित्र व्रत करने से व्‍यक्ति को श्री हरि विष्‍णु का आशीर्वाद मिलता है, जो इस ब्रह्मांड के पालनहार हैं 

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🕰️Parsva Ekadashi 2025 Date & Time:📅

पार्श्व एकादशी – बुधवार, 3 सितंबर 2025 को 

पारण का समय – 4 सितंबर, 02:05 बजे से शाम 04:35 बजे तक 

पारण दिवस हरि वासर समाप्ति क्षण – सुबह 10:18 बजे 

एकादशी तिथि आरंभ – 03 सितंबर 2025 को प्रातः 03:53 बजे से 

एकादशी तिथि समाप्त – 04 सितंबर 2025 को प्रातः 04:21 बजे 

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💐पार्श्व एकादशी का महत्व(Significance Of Parsva Ekadashi):💐

                    पार्श्व एकादशी(Parsva Ekadashi) प्राचीन काल से मनाई जाती रही हैऐसा माना जाता है कि पार्श्व एकादशी व्रत व्रत करने वाले को सुख, धन और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता हैइसके अलावा यह अतीत के पापों से छुटकारा दिलाता है और व्यक्ति को जन्म और मृत्यु के निरंतर चक्र से भी मुक्त करता हैपार्श्व एकादशी व्रत का पालन करने से, भक्तों को आध्यात्मिक लाभ होता है और इससे उन्हें अपनी इच्छा शक्ति को मजबूत करने में भी मदद मिलती हैपार्श्व एकादशी को अन्य एकादशियों से श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यहचतुर्मास(Chaturmas)अवधि के दौरान आती है और इस दौरान संचितपुण्यया गुणों का मूल्य सामान्य महीनों की तुलना में अधिक होता हैपार्श्व एकादशी का महत्वब्रह्म विवर्त पुराण(Brahma Vivarta Purana)में भगवान कृष्ण(Lord Krishna) और राजा युधिष्ठिर(King Yudhisthira) के बीच बातचीत के रूप में भी बताया गया है 

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🍀पार्श्व एकादशी की पूजा(Parshva Ekadashi Puja Vidhi):🍀


  • एकादशी व्रत दशमी तिथि की रात्रि से प्रारम्भ किया जाता है दशमी तिथि के दिन सूर्य अस्त होने के पश्चात भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए, यदि संभव ना हो तो फल व् दूध का सेवन कर सकते हैं 

  • एकादशी तिथि के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें यदि आपके घर के आसपास कोई पवित्र नदी नहीं है तो आप अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं
     
  • स्नान करने के पश्चात साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और एकादशी का व्रत करने का संकल्प लें

  • अब अपने घर के पूजा कक्ष में पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं और सामने एक लकड़ी की चौकी रखें 
     
  • अब इस चौकी पर थोड़ा सा गंगाजल छिड़क कर इसे शुद्ध करें 

  • अब चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु(Lord Vishnu) की मूर्ति या तस्वीर की स्थापना करें
      
  • भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने धुप और गाय के घी का दीपक जलाएं  
     
  • अब भगवान विष्णु की मूर्ति के समक्ष कलश की स्थापना करें  

  • अब अपनी क्षमता अनुसार भगवान विष्णु को फल, फूल, पान, सुपारी, नारियल, लौंग इत्यादि अर्पित करें 

  • संध्याकाल में  पार्श्व एकादशी की व्रत की कथा सुने और फलाहार करें 

  • यदि आप पूरा दिन व्रत करने में सक्षम नहीं है तो आप दिन में भी फलहार कर सकते हैं
      
  • अगले दिन सुबह स्नान करने के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद उन्हें दान दक्षिणा दें और व्रत का पारण करें 

  • एकादशी के दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है

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🌻पार्श्व परिवर्तिनी एकादशी व्रत के लाभ(Benefits of Parsva Parivarthini Ekadasi Vrat)?🌻 

   

                 पवित्र ग्रंथों के अनुसार, पार्श्व परिवर्तिनी एकादशी(Parsva Parivarthini Ekadasi) व्रत रखने से निम्नलिखित आशीर्वाद प्राप्त होते हैं: 
 

  • भगवान विष्णु(Lord Vishnu) से सभी पापों के लिए क्षमा मांगने में मदद मिलती है। 

  • शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करता है और मोक्ष प्राप्त करने में मदद करता है।
     
  • जन्म और मृत्यु के निरंतर चक्र से मुक्ति दिलाता है। 

  • इच्छाशक्ति को बढ़ाता है और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है।

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🍀 पार्श्व एकादशी के अनुष्ठान(Rituals of Parsva Ekadashi):🍀 

पार्श्व एकादशी पर पूजा विधि के अलावा कई अन्य अनुष्ठान भी किए जाते हैं: 


दान(Charity): जरूरतमंदों को दान देना इस दिन का एक अनिवार्य पहलू है। गरीबों और ज़रूरतमंदों को भोजन( food), वस्त्र(clothing) और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान किया जाता है। 

ध्यान(Meditation): भक्त अपने आध्यात्मिक जुड़ाव और आत्म-जागरूकता को बढ़ाने के लिए ध्यान और आत्मनिरीक्षण करते हैं। 

धर्मग्रंथों का पाठ(Reading Scriptures): भगवद् गीता या विष्णु सहस्रनाम( Vishnu Sahasranama) जैसे पवित्र ग्रंथों का पाठ करना या खड़े होकर सुनना अत्यंत पवित्र माना जाता है। ये पाठ व्यक्ति की समझ और भक्ति को गहरा करने में मदद करते हैं। 

मौन धारण(Observing Silence): कुछ भक्त अपनी आध्यात्मिक साधना पर ध्यान केंद्रित करने और ध्यान भटकाने से बचने के लिए दिन के कुछ समय के लिए मौन धारण करते हैं। 

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💐 पार्श्व एकादशी पर क्या करें और क्या न करें(Dos & Don’ts on Parsva Ekadashi): 💐  

 

क्या करें(Do’s): 

  • सूर्योदय से सूर्यास्त तक कठोर उपवास(fast) रखें, केवल फल(fruits), दूध(milk) और जल(water) ग्रहण करें।
  • मंत्रों का जाप और पवित्र ग्रंथों, विशेषकर विष्णु सहस्रनाम(Vishnu Sahasranama) का पाठ करके भक्ति में लीन रहें।
  • ज़रूरतमंदों को दया और पुण्य के कार्य के रूप में भोजन, वस्त्र और धन दान करें।
  • दिन भर ध्यान करें, आध्यात्मिक उत्थान और भगवान विष्णु के साथ जुड़ाव की खोज करें।

  
क्या न करें(Don’ts):

  • अनाज(grains), फलियाँ(beans) और प्याज़ व लहसुन(onions and garlic) जैसी कुछ सब्ज़ियों का सेवन करने से बचें।
  • शराब, मांस और अन्य अवांछित खाद्य पदार्थों का सेवन न करें जो आध्यात्मिक शुद्धता को भंग करते हैं।
  • क्रोध(anger), विवाद(disputes) और नकारात्मक विचारों(negative thoughts) से बचें। शांत और स्थिर मन बनाए रखें।
  • आलस्य से बचें और प्रार्थना और अन्य धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रहें।

 

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🍀Mantras of Parsva Ekadashi:🍀
 

ॐ श्री कृष्णाय शरणं मम । 

Om Shri Krishnay Sharanam Mam. 

  
 ॐ विष्णवे नम:। 

Om Vishnave Namah.   

 हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे हरे।  

हरे राम हरे राम, राम-राम हरे हरे। 

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna-Krishna Hare Hare. 

Hare Ram Hare Ram, Ram-Ram Hare Hare. 

  
 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।  

Om namo bhagvate vasudevay. 

  
 ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। 

Om Narayanaya Vidmahe. Vasudevaya dhimahi. Tanno Vishnu Prachodayat. 

 

 ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि। 

Om Namo Narayan. Shri Man Narayan Narayan Hari Hari. 

  
 श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।। 

Shri Krishna Govind Hare Murare. he Nath Narayan Vasudevay. 

  
 ॐ क्रीं कृष्णाय नमः।

Om Krim Krishnay Namah. 

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💐निष्कर्ष(Conclusion) 💐

                    पार्श्व एकादशी केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है; यह आध्यात्मिक महत्व और परिवर्तनकारी शक्ति से परिपूर्ण दिन है। इस पवित्र दिन व्रत रखने, पूजा करने और दान-पुण्य करने से आंतरिक शांति और दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। पार्श्व एकादशी पर किए जाने वाले अनुष्ठान, व्रत और दान हिंदू धर्म से गहराई से जुड़े हुए हैं। यह पवित्रता, निस्वार्थता और भक्तिमय जीवन को बढ़ावा देता है। 

  
              जब भक्त प्रार्थना(prayer), व्रत(fasting) और दान(charity) के माध्यम से भगवान विष्णु से जुड़ते हैं, तो वे आध्यात्मिक विकास और परम मुक्ति की ओर अपनी यात्रा शुरू करते हैं। पार्श्व एकादशी को निष्ठापूर्वक मनाने से अपार आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं, आत्मा शुद्ध होती है और व्यक्ति का जीवन दिव्य गुणों से परिपूर्ण होता है। 

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