हिंदुओं में नागों और साँपों की पूजा करने की एक प्राचीन परंपरा है, जिसे नाग पंचमी कहा जाता है। यह हर उस देश में मनाया जाता है जहाँ हिंदू रहते हैं। यह आमतौर पर श्रावण महीने के पाँचवें दिन होता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर पर जुलाई और अगस्त की अवधि को कवर करता है। हिंदू संस्कृति के अनुसार, साँप और नाग पाताल लोक में रहते हैं, जिसे भारतीय धर्मों में पाताल लोक के रूप में जाना जाता है। पाताल लोक में सात क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें से सबसे निचला भाग नाग-लोक कहलाता है। हिंदू इस विश्वास के साथ साँपों की पूजा करते हैं कि वे परिवारों पर आशीर्वाद और समृद्धि लाते हैं। इस दिन आमतौर पर नाग देवताओं को दूध पिलाया जाता है, फिर उनकी पूजा की जाती है।
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हम हर साल अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सारे त्यौहार मनाते हैं लेकिन हमारे हिंदी कैलेंडर में अंग्रेजी कैलेंडर से बहुत ज्यादा अधिक त्योहार होते हैं। उन्हीं में से एक होता है सावन के महीने में आने वाला नाग पंचमी का त्यौहार। जो सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तिथि के पांचवें दिन पर मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करना और उन्हें स्नान कराना बहुत महत्वपूर्ण और लाभकारी माना जाता है। प्रत्येक वर्ष इस त्यौहार को मनाने के लिए काशी, वाराणसी में एक स्थान पर बहुत बड़ा मेला लगता है। उस स्थान का नाम नाग कुआं है। सावन मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी नामक इस मेले में दूर-दूर से लोग आते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पर सर्व देवता के दर्शन हो जाए तो उस व्यक्ति की कुंडली से सारे सर्प दोष खत्म हो जाते हैं। नाग पंचमी के दिन विभिन्न गांवों और कस्बों में विभिन्न तरह के खेल भी होते हैं जिसमें कुश्ती का आयोजन भी होता है। इस दिन गाय बैल आदि पशुओं को भी नदी या तालाब में ले जाकर नहला धुलाकर तैयार किया जाता है ऐसा करना बहुत शुभ माना जाता है।
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नाग पंचमी की पूजा का नियम सभी का अलग होता हैं, कई तरह की मान्यता होती हैं. एक तरह की नाग पंचमी पूजा विधि यहाँ दी गई हैं.
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🍀 नाग पंचमी: शुक्रवार, 9 अगस्त, 2024 🍀
🌺 नाग पंचमी पूजा मुहूर्त : 04:53 AM से 07:31 AM तक 🌺
🌹अवधि : 02 घंटे 38 मिनट 🌹
🌻गुजरात में नाग पंचम तिथि : शनिवार, 24 अगस्त, 2024 🌻
💐पंचमी तिथि प्रारंभ : 12: 09 अगस्त, 2024 को प्रातः 36 बजे 💐
💐पंचमी तिथि समाप्त :10 अगस्त, 2024 को प्रातः 03:14 बजे 💐
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सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।
ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥
sarve nāgāḥ prīyantāṃ me ye kecit pṛthvītale।
ye ca helimarīcisthā ye’ntare divi saṃsthitāḥ॥
ye nadīṣu mahānāgā ye sarasvatigāminaḥ।
ye ca vāpītaḍageṣu teṣu sarveṣu vai namaḥ॥
Mantra Translation – May the snakes who are staying in this world, sky, heaven, sunrays, lakes, wells, ponds etc. bless us and we all salute them.
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अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्ख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥
anantaṃ vāsukiṃ śeṣaṃ padmanābhaṃ ca kambalam।
śaṅkha pālaṃ dhṛtarāṣṭraṃ takṣakaṃ kāliyaṃ tathā॥
etāni nava nāmāni nāgānāṃ ca mahātmanām।
sāyaṅkāle paṭhennityaṃ prātaḥkāle viśeṣataḥ।
tasya viṣabhayaṃ nāsti sarvatra vijayī bhavet॥
Mantra Translation – The names of nine Nag Devtas are Ananta, Vasuki, Shesha, Padmanabha, Kambala, Shankhapala, Dhritarashtra, Takshaka and Kaliya. If chanted regularly every day in the morning, it will keep you protected from all evils and make you victorious in life.